– नए नारे के साथ असम में सियासी जमीन तलाशता झामुमो
न्यूज स्टॉपेज डेस्क
असम विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) इस बार एक स्पष्ट और आक्रामक राजनीतिक संदेश के साथ मैदान में उतरा है। “हक, अधिकार और सम्मान – जेएमएम ही है समाधान” के नारे को पार्टी ने अपने चुनावी अभियान का केंद्र बनाया है। इस संदेश के जरिए झामुमो खास तौर पर टी-ट्राइब और आदिवासी समाज के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है और असम में अपनी अलग पहचान स्थापित करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
निर्वाचन आयोग की मंजूरी से कार्यकर्ताओं में बढ़ा उत्साह
असम चुनाव में झामुमो को अपने पारंपरिक चुनाव चिन्ह ‘तीर-धनुष’ के इस्तेमाल की अनुमति मिल गई है। भारतीय निर्वाचन आयोग से मिली इस मंजूरी के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। संगठन से जुड़े लोग इसे चुनावी मजबूती और पहचान की बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। जमीनी स्तर पर कार्यकर्ता अब ज्यादा आत्मविश्वास के साथ प्रचार में जुट गए हैं और इसे मनोबल बढ़ाने वाला बड़ा फैक्टर माना जा रहा है।

आदिवासी वोट बैंक पर केंद्रित रणनीति
झामुमो की नजर असम की उन 35 से 40 सीटों पर है, जहां टी-ट्राइब और आदिवासी मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। पिछले एक साल से पार्टी इन इलाकों में सक्रिय है और संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठा रही है।
नेतृत्व की सक्रियता से तेज हुई चुनावी तैयारी
असम में पार्टी की सक्रियता सुनियोजित रणनीति का हिस्सा रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के दौरे, मंत्री चमरा लिंडा और सांसद विजय हांसदा की टीम के जमीनी अध्ययन के बाद अब झामुमो माइक्रो लेवल पर चुनावी तैयारी में जुटी है। जरूरत पड़ने पर स्थानीय दलों के साथ तालमेल की रणनीति पर भी काम जारी है।
गठबंधन नहीं बना, अकेले चुनाव मैदान में उतरी पार्टी
कांग्रेस के साथ सीट शेयरिंग पर सहमति नहीं बनने के बाद झामुमो ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला लिया है। पार्टी 19 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार रही है, जबकि एक सीट भाकपा माले के लिए छोड़ी गई है। नामांकन की अंतिम तिथि को देखते हुए पार्टी ने तेजी से अपनी रणनीति को अंतिम रूप दिया।
