
न्यूज स्टॉपेज डेस्क
माहे रमजान के पाक महीने में जहां बड़े-बुजुर्ग इबादत में मशगूल हैं, वहीं रांची के एक छोटे बच्चे ने अपने जज़्बे और हौसले से सभी को प्रभावित किया है। कांटाटोली शांति नगर निवासी सरफराज कुरैशी के आठ वर्षीय पुत्र मोहम्मद अफ्फान ने रमजान के 26 रोजों में से 20 रोजे मुकम्मल कर एक मिसाल पेश की है। इतनी कम उम्र में रोजा रखने के उसके संकल्प और इबादत के जज़्बे की मोहल्ले में काफी सराहना हो रही है।
कम उम्र में मजबूत इरादा और अनुशासन
डीएवी बरियातु के क्लास टू (डी) में पढ़ने वाले मोहम्मद अफ्फान ने तपती धूप और भूख-प्यास की परवाह किए बिना रमजान के 20 रोजे पूरे किए। इन दिनों उसका स्कूल का फाइनल एग्जाम भी चल रहा है। ऐसे में परिजनों ने उसे समझाकर परीक्षा वाले दिनों में रोजा नहीं रखने के लिए राजी किया, ताकि उसकी पढ़ाई पर असर न पड़े और वह परीक्षा भी अच्छे से दे सके।
पाबंदी से नमाज और पहली बार तरावीह
अफ्फान रोजा रखने के साथ पांच वक्त की नमाज भी पूरी पाबंदी से अदा कर रहा है। इसके साथ ही वह इस साल पहली बार मस्जिद में तरावीह की नमाज भी अदा कर रहा है। परिवार के लोगों के अनुसार अफ्फान नमाज के साथ-साथ कुरआन पाक पढ़ना भी सीख रहा है और धार्मिक शिक्षा में उसकी गहरी रुचि दिखाई दे रही है।
परिवार ने जताई खुशी और गर्व
अफ्फान के रोजे मुकम्मल करने पर उसके दादा एकराम कुरैशी, नानी फिरोजा बानो समेत परिवार के अन्य सदस्यों और रिश्तेदारों ने उसे बधाई दी। अफ्फान के वालिद सरफराज कुरैशी और अम्मी शाहीना फातमा ने बताया कि वह सेहरी से लेकर इफ्तार तक रोजे के सभी नियमों का पूरी लगन से पालन करता है।
सभी के लिए करता है दुआएं
अफ्फान इफ्तार के समय अपनी पढ़ाई के साथ-साथ सभी के लिए अल्लाह पाक से दुआ भी करता है। परिवार का कहना है कि इतनी कम उम्र में रोजा रखना आसान नहीं होता, लेकिन अफ्फान के मजबूत इरादे और धार्मिक भावना ने सभी को प्रभावित किया है। बच्चे के इस जज़्बे को देखकर पूरा परिवार खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
